शूरा नाम धराय के, अब क्यों डरपै बीर।
मंडि रहिना मैदान में, सन्मुख सहना तीर।।
अर्थ: यदि आपने स्वयं को 'शूरवीर' या साहसी कहा है, तो अब भयभीत होने का कोई अर्थ नहीं है। एक सच्चे योद्धा की पहचान यही है कि वह युद्ध के मैदान में अडिग रहे और सामने से आने वाले प्रहारों और तीरों को बिना विचलित हुए सहन करे।
Meaning: If you have claimed the title of a 'brave warrior' for yourself, why do you now succumb to fear? The true mark of a hero is to remain steadfast in the open field of battle, facing the arrows of adversity head-on without flinching.









