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Kabir Dohe Videos — कबीर दोहे वीडियो

कबीर के दोहे वीडियो में सुनें — हर दोहे का मधुर वाचन (Watch and listen to Kabir dohe videos — melodious recitations of every couplet)

रचनहार को जान ले, खाने को क्या रोय - कबीर साहब

प्रीति बहुत संसार में, नाना विधि की सोय - कबीर साहब

बहता पानी निर्मला, बंधे सो गंदा होय - कबीर साहब

आतम अनुभव जब भयो, तब नहीं हर्ष विशाद - कबीर साहब

ज्यों नैनन में पुतली, त्यों मालिक घर माही - कबीर साहब

जहाँ प्रेम तहां नेम नहीं, तहां न बुद्धि व्यवहार - कबीर साहब

छिनहि चढ़े छिन उतरे, सो तो प्रेम न होय - कबीर साहब

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय - कबीर साहब

कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई - कबीर साहब

साधो यह मन मसखरा, कहूं तो मानै रोस - कबीर साहब

सात समुद्र की एक लहर, मन की लहर अनेक - कबीर साहब

मरण भला तब जानिए, छूट जाए हंकार - कबीर साहब

आया था किस काम को, तू सोया चादर तान - कबीर साहब

नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग - कबीर साहब

साधो सोता क्या करे, जागो जपो मुरार - कबीर साहब

आस-पास जोधा खड़े, सबै बजावै गाल - कबीर साहब

जिनके नाम निशान है, तिन अटकावै कौन - कबीर साहब

जाता है सो जान दे, तेरी दसा न जाए - कबीर साहब

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर - कबीर साहब

हरिजन तो हारा भला, जीतन दे संसार - कबीर साहब

आछे दिन पाछे गए, हरि से कियो न हेत - कबीर साहब

मन के बहुतक रंग हैं, छिन-छिन बदले सोय - कबीर साहब

वृक्ष बोला पात से, सुन पत्ते मेरी बात - कबीर साहब

सहकामी सुमिरन करै, पावै उत्तम धाम - कबीर साहब

अपना तो कोई नहीं, देखा ठोक बजाय - कबीर साहब

धरती फाटे, मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर - कबीर साहब

साधो सब सुख राम हैं, औरहि दुख की रासि - कबीर साहब

साधो संगत साधु की, जौ की भूसी खाय - कबीर साहब

आस-पास जोधा खड़े, सबै बजावै गाल - कबीर साहब

घाटे पानी सब भरे, अवघट भरे न कोय - कबीर साहब

माया मद तोकूं चढ़ा, मत भूले मतिमंद - कबीर साहब

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद - कबीर साहब

मरण भला तब जानिए, छूट जाए हंकार - कबीर साहब

जाता है सो जाण दे, तेरी दसा न जाइ - कबीर साहब

माया छाया एक सी, बिरला जाने कोय - कबीर साहब

देह धरे का दंड है, सब काहू को होय - कबीर साहब

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप - कबीर साहब

जाति हमारी आत्मा, गोत्र हमारा ब्रह्म - कबीर साहब

जब से मैंने जन्म लिया, कभी ना पाया सुख - कबीर साहब

सुखिया ढूंढत मैं फिरू, सुखिया मिले न कोय - कबीर साहब

प्रेम-प्रेम सब कोई कहैं, प्रेम न जाने कोय - कबीर साहब

यह तो घर है प्रेम का, खाला का घर नाहिं - कबीर साहब

बहता पानी निर्मला, बंधा गंदा होय - कबीर साहब

माया दोय प्रकार की, जो कोय जानै खाय - कबीर साहब

कबीर सोई पीर है, जो जाने पर पीर - कबीर साहब

नदी किनारे मैं खड़ी, ज्यों जल मैला होय - कबीर साहब

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर - कबीर साहब

झूठा सब संसार है, कोउ न अपना मीत - कबीर साहब

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह - कबीर साहब

कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय - कबीर साहब

सब धरती कागज़ करू, लेखनी सब बनराय - कबीर साहब

सहकामी सुमिरन करै, पावै उत्तम धाम - कबीर साहब

माया माया सब कहे, माया लखे ना कोय - कबीर साहब

जिस मरने से जग डरे, मेरो मन आनंद - कबीर साहब

जहाँ प्रेम तहां नेम नहीं - कबीर साहब

जिहि घट प्रीति न प्रेम रस - कबीर साहब

चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोये - कबीर साहब