अंषडियां प्रेम कसाइयां, लोग जांणे दुखड़ियां।
सांई अपणैं कारणैं, रोइ रोइ रतड़ियां।।
अर्थ: प्रेम की पीड़ा बाहरी दुनिया के लिए केवल एक दुखद अनुभव या मानसिक कष्ट प्रतीत होती है, लेकिन एक सच्चे साधक के लिए यह विरह उस परमात्मा (सांई) के प्रति गहन प्रेम है। यह दर्द वास्तव में आत्मा की वह तड़प है जो अपने मूल स्रोत से मिलने के लिए व्याकुल है।
Meaning: The pangs of divine love are perceived by the worldly as mere suffering or misery. However, for the seeker, this agony is a sacred longing for the Beloved (the Divine). It is the soul's intense yearning to merge back into its original source, transforming pain into a spiritual catalyst.









