राम नाम सब कोई कहै, कहिबे बहुत विचार।
सोई राम सती कहै, सोई कौतिग हार।।
अर्थ: कबीर कहते हैं कि 'राम' नाम का जाप तो हर कोई करता है, लेकिन इस जाप के पीछे का वास्तविक उद्देश्य और गहराई सबके लिए अलग होती है। केवल वही व्यक्ति वास्तव में राम को जान पाया है जिसने अपनी इंद्रियों और अहंकार का त्याग कर दिया है और जो सांसारिक मोह-माया के बंधनों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
Meaning: Kabir observes that while everyone chants the name of 'Ram', the intent and depth behind such recitation vary greatly. Only those who have truly transcended the ego and severed the ties of worldly attachment can be said to have actually realized the Divine essence of Ram.



