सबै हमारे एकहैं, जो सुमिरै हरि नाम।
वस्तु लही पहिचान कै, बासन सों क्या काम।।
अर्थ: कबीर कहते हैं कि जो ईश्वर के नाम का स्मरण करते हैं, वे सभी वास्तव में एक ही मूल तत्व के अंश हैं। जब व्यक्ति उस मूल तत्व या वास्तविक सत्य को पहचान लेता है, तो बाहरी आवरणों, जैसे कि बर्तनों या बाहरी पहचानों का कोई महत्व नहीं रह जाता।
Meaning: Kabir asserts that all those who meditate upon the Divine Name are essentially one. Once the true essence or the primordial substance is recognized, the external containers—the superficial identities and forms—become irrelevant and meaningless.









