कबीर भूलि बिगाड़िया, तूं नां करि मैला चित।
साहिब गरवा लोड़िये, नफर बिगाड़ैं नित।।
अर्थ: कबीर कहते हैं कि यदि अतीत में कोई भूल हुई है या जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, तो अब अपने मन को ग्लानि या द्वेष से मैला मत करो। उस परमात्मा (साहिब) की शरण में जाओ जो शुद्ध करता है, क्योंकि दूसरों के प्रति नफरत केवल स्वयं के अस्तित्व को और अधिक बिगाड़ती है।
Meaning: Kabir asserts that even if past mistakes have derailed your life, do not further pollute your consciousness with guilt or malice. Seek refuge in the Divine Master who purifies the soul, for harboring hatred toward others only serves to further degrade one's own spiritual essence.









