प्रेम बिना नहिं भेष कछु, नाहक करै सुवाद।
प्रेम बाद जग लग नहीं, सबै भेष बरबाद।।
अर्थ: बिना प्रेम के बाहरी दिखावा, वेशभूषा या धार्मिक आडंबर व्यर्थ हैं। यदि हृदय में सच्चा प्रेम नहीं है, तो मीठी बातें करना और पवित्र दिखने का प्रयास करना केवल एक निरर्थक प्रयास है। प्रेम के अभाव में संसार के सभी बाहरी रूप और अनुष्ठान पूरी तरह से अर्थहीन और बर्बाद हो जाते हैं।
Meaning: Without true love, all outward appearances, religious attire, and formal rituals are meaningless. If the heart lacks genuine love, speaking sweet words or attempting to appear holy is a futile exercise. In the absence of love, all worldly adornments and spiritual pretenses are utterly wasted and void of value.









